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गेहूं की कम कीमत से किसान की मौत, मंडी में हार्ट अटैक

On: May 23, 2026 4:18 PM
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गेहूं की कम कीमत से किसान की मौत, मंडी में हार्ट अटैक


कोटा: राजस्थान के कोटा जिले की भामाशाह मंडी में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां गेहूं बेचने आए एक किसान की हार्ट-अटैक से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मंडी में गेहूं की कम कीमत मिलने से किसान तनाव में आ गए थे। इससे पहले उनकी फसल बारिश और ओलावृष्टि के कारण पहले ही खराब हो चुकी थी।

नीलामी के दौरान बिगड़ी तबीयत

जानकारी के अनुसार, गांव झाड़आमली निवासी 54 वर्षीय किसान हंसराज वैष्णव बुधवार सुबह करीब 11 बजे मंडी यार्ड में अपनी फसल बेचने के लिए खड़े थे। इसी दौरान गेहूं की नीलामी में अपेक्षा से काफी कम कीमत लगी।

कीमत कम लगने से किसान मानसिक रूप से परेशान हो गए और अचानक अचेत होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें संभालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

किराए की जमीन पर की थी खेती

परिवार के सदस्य प्रवीण ने बताया कि हंसराज वैष्णव के पास खुद की करीब 4 बीघा जमीन थी। इसके अलावा उन्होंने 10 से 12 बीघा जमीन किराए (लीज) पर लेकर इस बार गेहूं की खेती की थी।

हालांकि, हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि से उनकी फसल को काफी नुकसान हुआ था। इसके बावजूद वे उम्मीद के साथ बुधवार सुबह करीब 4 बजे पिकअप में गेहूं भरकर मंडी के लिए रवाना हुए थे।

पहले भी फसल खराब, कर्ज में डूबे थे किसान

परिवार के अनुसार, हंसराज वैष्णव पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे। पिछले साल उनकी सोयाबीन की फसल भी खराब हो गई थी। इस कारण उन पर करीब 8.50 लाख रुपए का कर्ज हो गया था।

लगातार फसल खराब होने और कर्ज के बोझ से वे पहले ही मानसिक तनाव में थे। मंडी में गेहूं की कम कीमत मिलने से उनकी चिंता और बढ़ गई, जिससे हार्ट अटैक आने की आशंका जताई जा रही है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक किसान के बेटे अजय ने बताया कि उन्हें दोपहर करीब 1 बजे पिता की मौत की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि उनके पिता कर्ज लेकर खेती करते थे और कई लोग उनसे उधार के पैसे मांग रहे थे।

इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में भी इस घटना से शोक का माहौल है।

कृषि संकट की फिर उजागर हुई सच्चाई

यह घटना एक बार फिर किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि संकट की गंभीरता को उजागर करती है। मौसम की मार, फसल नुकसान और बाजार में उचित कीमत न मिलने से किसान लगातार परेशान हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को उचित समर्थन मूल्य और समय पर राहत मिलना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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