चूरू में करीब 10 साल पहले परिवार से बिछड़ा मुन्नू गुरुवार को अपनों के बीच पहुंच गया। लंबे समय तक तलाश के बाद परिजनों ने उसे मृत मान लिया था। विमला देवी सेवा आश्रम के संचालक समाजसेवी मनीष शर्मा की पहल और पुलिस के सहयोग से मुन्नू की पहचान उसके परिवार तक पहुंच सकी।
करीब दो-तीन महीने पहले मुन्नू शहर में घूमता मिला था, जिसके बाद उसे आश्रम लाया गया। पहचान और गांव से जुड़ी जानकारी जुटाने के बाद पुलिस के माध्यम से परिजनों से संपर्क किया गया।
आश्रम में मिला, पुलिस की मदद से परिवार तक पहुंचा
आश्रम संचालक मनीष शर्मा के अनुसार, करीब दो-तीन महीने पहले मुन्नू शहर में घूमता मिला था। सूचना मिलने पर उसे विमला देवी सेवा आश्रम लाया गया। इसके बाद उसकी पहचान और परिवार से संबंधित जानकारी जुटाने का प्रयास शुरू किया गया।
आश्रम की ओर से देवरिया पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। इसके बाद रुद्रपुर थाना पुलिस ने मुन्नू के गांव हल्लादपुर मड़कड़ी के सरपंच से संपर्क किया। पुलिस और स्थानीय स्तर पर जानकारी साझा होने के बाद उसके परिजनों तक सूचना पहुंची कि मुन्नू जीवित है और आश्रम में सुरक्षित है।
दस साल से परिजन कर रहे थे तलाश
परिजनों के मुताबिक, मुन्नू के लापता होने के बाद उन्होंने रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित स्थानों पर काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ परिवार की उम्मीद टूटती गई और उन्होंने उसे मृत मान लिया।
ऐसे में करीब दस साल बाद उसके जीवित होने और आश्रम में सुरक्षित मिलने की खबर परिवार के लिए बेहद भावुक कर देने वाली रही। वर्षों से जिस व्यक्ति के लौटने की उम्मीद परिवार ने छोड़ दी थी, उसके अचानक सामने आने से घर में खुशी का माहौल बन गया।
चाचा को देखते ही भतीजों ने लगाया गले
गुरुवार शाम आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आश्रम संचालक ने मुन्नू को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। उसे लेने पहुंचे भतीजे आकाश और अंकित यादव ने अपने चाचा को देखते ही गले लगा लिया।
यह भावुक दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। भतीजों ने बताया कि इतने वर्षों बाद चाचा को अपने सामने देखने की उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।
मुलाकात के दौरान परिवार के सदस्यों ने मुन्नू से बातचीत की और उसे घर ले जाने की तैयारी की। लंबे समय बाद परिवार के बीच लौटे मुन्नू भी भावुक नजर आए। परिजनों ने आश्रम संचालक मनीष शर्मा और पुलिस का आभार जताया।
दस साल बाद मुन्नू के सकुशल परिवार के बीच लौटने से परिजनों की बुझ चुकी उम्मीद फिर से जगी। आश्रम और पुलिस के प्रयासों से परिवार को अपने बिछड़े सदस्य के जीवित होने की जानकारी मिली और आखिरकार वह अपनों के बीच पहुंच सका।
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